निक्के जहे पालने च पाया बावा लाल माँ

पारंपरिक
अन्य भजन बावा लाल दयाल भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

निक्के जहे पालने च पाया बावा लाल माँ दिंदी एह लोरियां,

दूज वाला चन बन आया बावा लाल माँ दिंदी एह लोरियां,

सखियाँ सहेलिया ने लाल नु निहारिया देखो किना सोहना बाल सब ने पुकारियां

एह ता किसे देवते दा होया अवतार माँ दिंदी एह लोरियां,

शहर कसूर विच अजब नजारा ऐ माघ दे महीने विच खीडीया बहारा ने

साधू संत आये सब करन दीदार माँ दिंदी एह लोरियां,

भोला मल ऋषिया नु लाल वखाउन्दे ने

ऋषि मुनि देख मुख वचन सुनांदे ने,

एह ता सुनो दुनिया दा आया तारण हार माँ दिंदी एह लोरियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।