लाल दे द्वारे उते लगियां ने रोनका

पारंपरिक
अन्य भजन बावा लाल दयाल भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

लाल दे द्वारे उते लगियां ने रोनका,

भगत द्वारे भेटा गा रहे ने

नाले ताड़ियाँ ते ताड़ियाँ बजा रहे ने

आओ जीने करना दीदार बाबा लाल दा,

आओ जीने करना दीदार तिलका वाले दा

हथ चुक बोलना जय कारा ऐ

नाले पाओना ओहदे दर्श दा नजारा ऐ,

आसा ते मुरादा एह करदा ऐ पुरियां

भगता नु वंड दा एह सबर सबुरियां चरना च जो चित लाउंदें ने

एथो मन चाहा फल पाऊंदे ने

मंगलो एह मुरादा एह ता भरदा ऐ झोलिया

खेल दे ने भगत दे नाम दियां होलियाँ

मेरे लाल दे द्वार उते रंग बरसे

देख देख ऐ नजारा साडा मन हरषे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।