उल्जी कान्हा से नजरिया कैसे सुल्जे

अलका गोएल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

उल्जी कान्हा से नजरिया कैसे सुल्जे॥

किसे सुल्जे कोई कह दे उनसे

भोली भाली सूरत उसकी बड़े बड़े है नैना॥

प्यारी प्यारी शवि दिखा के ले गया दिल का चेना,

मेरी बाली रे उमरिया कैसे सुल्जे,

उल्जी कान्हा से नजरिया कैसे सुल्जे......

रूप सलोना नन्द का चोर नटखट शेन छबीला॥

गौए चारे वन वन डोले सवारिया रसीला,

ओदी काली रे कमरिया कैसे सुल्जे,

उल्जी कान्हा से नजरिया कैसे सुल्जे......

भोली भाली सूरत उसकी बड़े बड़े है नैना॥

प्यारी प्यारी शवि दिखा के ले गया दिल का चेना,

मेरी बाली रे उमरिया कैसे सुल्जे,

उल्जी कान्हा से नजरिया कैसे सुल्जे......

घर से निकली पनिया भरन को उर्डके लाल चुनरिया॥

यमुना तट पर मिल गया शेन शबीला मिल गया रे सांवरिया

उल्जी कान्हा से नजरिया कैसे सुल्जे......

ना मैं ज्ञानी ना में ध्यानी ना में चतर सुजन

आस लगा कर में दर पर बेठी दर्शन दे दो गंश्यम

उल्जी कान्हा से नजरिया कैसे सुल्जे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।