तन कोई छूता नहीं चेतन

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॥ पावन पाठ ॥

तन कोई छूता नहीं चेतन निकल जाने के बाद

फेंक देते फूल को खुशबु निकल जाने के बाद

आज जो करते किलोलें खेलते है साथ में

कल डरेंगे देखकर तन निर्जीव हो जाने के बाद

बोलते जब तक सगे है चार पैसे पास में

नाम भी पूछे नहीं पैसा निकल जाने के बाद

स्वार्थ प्यारा रह गया असली मुहब्ब्त उठ गई

भूल जाता माँ को बच्चा पर निकल जाने के बाद

इस अस्थिर संसार में तू क्यों घमंडी हो रहा

देख फिर पछतायेगा समय निकल जाने के बाद

कैसे सुखिया होवेगा जो नहीं करता भजन

नर्क में जाना पड़ेगा पुण्य निकल जाने के बाद

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।