तेरे परां नाल उड़े

अलका गोएल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे परां नाल उड़े जाने आ

नहिते साणु सोन जाणदा

कोण जाणदा कोण जाणदा कोण जाणदा

तेरे परां....

ऊँगली जेह फड़ी श्यामा रस्ते वि मिल गए

बंजर जमीना विच फुल श्यामा खिल गए

तुसा फड़ लयी जे इक साहड़ी बाह नहिते साणु कोण जाणदा

तेरे परां....

प्यार तेरा पाके प्यार सबना दा पालिया

तैनू अपनाया मैनु जग अपनालिया

तुसा दीती मैनु चरना च था नहिते साणु कोण जाणदा

तेरे परां.....

अगर उस ईश्वर की कृपा हो गए

तो भगवान खुद अपने हो जाते है

होके दीवाना जे मैं तेरी महिमा गान्दा

मैं भी बेमान हुँदा मान किते खांदा ना

तुसा दीती मैनु चरना च था नहिते साणु कोण जाणदा

तेरे परां....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।