कैसे करूँ तेरी आराधना

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन गुरुदेव भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

कैसे करूँ, तेरी मैं,, आराधना ll

मोहे गुण, नाहीं रे ll

साँवले रँगीले, प्रीतम प्यारे l

चरण प्रीत दे, मोहे प्रितपारे l

मैं जाऊँ, बलिहारे,

मोहे गुण, नाहीं रे, मोहे गुण, नाहीं रे l

कैसे करूँ, तेरी मैं,, आराधना ll

गुर बिन मुक्त, न पायो कोई,

मुक्त न, पायो कोई l

हरि की भक्ति, गुर संग होई,

भक्ति, गुर संग होई l

गुर ज्ञान, बतायो रे,

मोहे गुण, नाहीं रे, मोहे गुण, नाहीं रे l

कैसे करूँ, तेरी मैं,, आराधना ll

दास की आसा, पूरी कीजै,

आसा, पूरी कीजै l

ह्रदय बसकर, चरणों में लीजै,

चरणों में, लीजै l

मोहे दरसन की, प्यास रे,

मोहे गुण, नाहीं रे, मोहे गुण, नाहीं रे l

कैसे करूँ, तेरी मैं,, आराधना ll

मोहे गुण, नाहीं रे lllll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।