घोट के भांग

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

रे सुन गोरा बात मेरी मने घोट के भांग पिला दे,

न समजे गोरा बात मेरी चैन जिया ने दिला दे

तेरी भांग घोट के हारी तेरी भांग घोट के हारी

हाथा में छाले पड़गए मैं अपने पीहर जा रही

ना समजे गोरा बात मेरी चैन जिया ने दिला दे

तेरी गल में सर्प विराजे तू भूता गेला नाचे तेरा डम डम डमरू बाजे

जता में तेरी गंगा है चम चमचंदा साजे

रे सुन गोरा बात मेरी मने घोट के भांग पिला दे,

सुन गणपति की मेह्तारी लुक लुक के पीहर जावे

हाथा में छाल पड़े न पल भर से मिसी लावे

ना जाऊ भोले पीहर मैं चाहे जितनी भांग घुटा ले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।