है मेरी यही प्रार्थना

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - आणि शुद्ध मन आस्था ....

है मेरी यही प्रार्थना , करता रहूं आराधना

है शंखेश्वर पारस नाथ , रखदो प्रभु मेरे सिर पर हाथ हर जन्म मुझे देना साथ,

है वीतरागी करुणाकर मांगु बस में इतना वर

करो कृपा की अब बरसात रखदो प्रभु मेरे सिर पे हाथ

हर जन्म मुझे देना साथ

सुबह शाम तेरा ध्यान धरु

दीन दुखी की सेवा करू

यही अरज है दीनानाथ

रखदो प्रभु मेरे सिर पे हाथ

हर जन्म मुझे देना साथ

जब तक है मेरा जीवन

करता रहु तेरा सुमिरन

भगवन दो ऐसी सौगात

रखदो प्रभु मेरे सिर पे हाथ

हर जन्म मुझे देना साथ

✍️ रचनाकार ✍️

दिलीप सिंह सिसोदिया

❤️ दिलबर ❤️

नागदा जक्शन म.प्र .

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।