भव्य निराला प्रेम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

द्वारिका में रखा सुदामा ने, पहला कदम,

उसी पल हो गयी, आँखे कान्हा की नम,

कैसे दौड़े कन्हैया कुछ कहा नहीं जाये ,

बिना मिले मेरे शाम से अब रहा नहीं जाये ,

कान्हो को देख सुदामा, भूल गए गम ,

अपने हाथो से कान्हा छप्पन भोग खिलाये,

सब रनिया सेवा में , मिलके चवर हिलाये,

सेवा मै जितनी करू आज, उतनी है काम,

भोला भोला सुदमा अपनी पोटली छुपाये ,

अन्तर्यामी मेरे शाम से, कुछ चुप नहीं पाए ,

मेरे रहते तुमने सही प्यारे, इतने सितम,

ऐसा भव्य निराला प्रेम, आँखे भर आये ,

इससे आगे कुछ ललित से, कहा नहीं जाये,

जग से न्यारा है, ऐसा है ये प्रेम मिलन,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।