अनंत बेअंत महिमा उसदी

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

अनंत बेअंत महिमा उसदी

महिमा उसदी महिमा उसदी

वेद कतेब न समावे

अनंत बेअनंत महिमा उसदी

जगजीवन दाता मिले संजोगी

सतुगुरु मेल मिलावे

अनंत बेअनंत महिमा उसदी

गुरु नरायन निरजन मस्तक

अनहद नाद वजावे

अनंत बेअनंत महिमा उसदी

गुरु ज्ञान मिले वडभागी

थुर लिखियाँ लेखा पावे

अनंत बेअनंत महिमा उसदी

दर्शन दास कर धंधोत वंदना

किरपा करो हरी राये

अनंत बेअनंत महिमा उसदी

ਅਨੰਤ ਬੇਅੰਤ, ਮਹਿਮਾ ਉਸਦੀ xll

*ਮਹਿਮਾ ਉਸਦੀ, ਮਹਿਮਾ ਉਸਦੀ* xll

ਵੇਦ ਕਤੇਬ ਨਾ, ਸਮਾਵੈ xll

ਅਨੰਤ ਬੇਅੰਤ, ਮਹਿਮਾ ਉਸਦੀ xll

ਜਗਜੀਵਨ ਦਾਤਾ, ਮਿਲੈ ਸੰਜੋਗੀ xll

ਸਤਿਗੁਰ ਮੇਲ, ਮਿਲਾਵੈ xll

ਅਨੰਤ ਬੇਅੰਤ, ਮਹਿਮਾ ਉਸਦੀ xll

ਗੁਰ ਨਰਾਇਣ, ਨਿਰੰਜਨ ਮਸਤਕ xll

ਅਨਹਦ ਨਾਦ, ਵਜਾਵੈ xll

ਅਨੰਤ ਬੇਅੰਤ, ਮਹਿਮਾ ਉਸਦੀ xll

ਗੁਰ ਗਿਆਨ, ਮਿਲੈ ਵਡਭਾਗੀ xll

ਧੁਰ ਲਿਖਿਆ, ਲੇਖਾਂ ਪਾਵੈ xll

ਅਨੰਤ ਬੇਅੰਤ, ਮਹਿਮਾ ਉਸਦੀ xll

ਦਰਸ਼ਨ ਦਾਸ ਕਰ, ਡੰਡਉਤਿ ਵੰਦਨਾ* xll

ਕਿਰਪਾ ਕਰੋ, ਹਰਿ ਰਾਏ xll

ਅਨੰਤ ਬੇਅੰਤ, ਮਹਿਮਾ ਉਸਦੀ xll

ਅਪਲੋਡਰ- ਅਨਿਲਰਾਮੂਰਤੀਭੋਪਾਲ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।