मैं तो आवियों रे, दर्शन दिजो भैरू दादा

पारंपरिक
अन्य भजन जैन भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जय जय भैरू नाकोड़ा, दर्शन दिजो आज ।

शरणे आयो भैरू आपरे, राखजो भक्तों री लाज ॥

मैं तो आवियों रे, दर्शन दिजो भैरू दादा,

मैं तो आवियों रे, दर्शन दिजो भैरू दादा,

दिजो भैरू दादा के म्हारे धरो शीश पर हाथ,

मैं तो आवियों रे, दर्शन दिजो भैरू दादा ॥

ऊंचे भाकर आप बिराजो, महिमा थारी भारी,

महिमा भारी थारी, भैरूजी, महिमा थारी भारी ।

भक्त जन मिल करे सेवना,

भक्त जन मिल करे आरती, भैरू दादा थारी ॥

मैं तो आवियों रे, दर्शन दिजो भैरू दादा ॥

दुर दुर सु भक्त आपरे, आवे दादा द्वारे,

आवे दादा द्वारे, भैरूजी, आवे दादा द्वारे ।

मेवा मिठाई रा भोग चढ़ावे,

मेवा मिठाई रा भोग चढ़ावे, सब नर नारी थारे ॥

मैं तो आवियों रे, दर्शन दिजो भैरू दादा ॥

पापी सी री फौज भगावी, तीरथ नी रक्षा की थी,

तीरथ नी रक्षा की थी, भैरूजी, तीरथ नी रक्षा की थी ।

भमरोरी की फौज उडावी,

भमरोरी की फौज उडावी, तीरथ नी महिमा वधावी ॥

मैं तो आवियों रे, दर्शन दिजो भैरू दादा ॥

सब भक्तों पर कर कृपा, दर्शन दिजो दादा,

दर्शन दिजो दादा, थे तो, दर्शन दिजो दादा ।

नाकोड़ा दरबार ऊपर,

थारे भक्तों रे ऊपर, राखजो छत्रछाया ॥

मैं तो आवियों रे, दर्शन दिजो भैरू दादा ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।