करते हैं दादा तेरा हर पल शुक्रिया

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॥ पावन पाठ ॥

करते हैं दादा, तेरा हर पल शुक्रिया,

खुशियां जो दी हैं, उसका भी शुक्रिया ।

हम तेरा दिया खाएं, तेरा ही गुण गाएं,

जीवन दिया जो, उसका भी शुक्रिया ॥

करते हैं दादा, तेरा हर पल शुक्रिया..

जब से हैं देखी, तेरी ये मुरत,

आंखों में बस गई हैं तेरी ये सूरत ।

तेरा दर्शन मुझे मिला, मुरझाया फूल खिला,

नजरें जो दी है, उसका भी शुक्रिया ॥

करते हैं दादा, तेरा हर पल शुक्रिया..

हर पल जुबां पे, नाम हो तेरा,

तेरा गुणगान करना, काम हो मेरा ।

तेरा सुमिरन सदा करू, तेरा ही ध्यान धरु,

वाणी जो दी हैं, उसका भी शुक्रिया ॥

करते हैं दादा, तेरा हर पल शुक्रिया..

तेरी कृपा से, लगन ये लगी हैं,

सोई हुई तकदीर जगी हैं ।

तेरी भक्ति मुझे मिली, जीवन को राह मिली,

भक्ति जो दी हैं, उसका भी शुक्रिया ॥

करते हैं दादा, तेरा हर पल शुक्रिया..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।