नाकोड़ा भैरूजी सबको प्यारे हैं

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॥ पावन पाठ ॥

नाकोड़ा भैरूजी सबको प्यारे हैं,

सबके सहारे है, पालनहारे हैं ।

सदा जपो तो वारे न्यारे हैं,

नाकोड़ा भैरूजी सबको प्यारे है ॥

कलयुग के अवतारी है, पर्चा हैं भारी,

भैरूजी की महिमा हैं, दुनिया में न्यारी ।

आते हैं दूर से भक्त सारे है,

सबके सहारे है, पालनहारे हैं ।

सदा जपो तो वारे न्यारे हैं,

नाकोड़ा भैरूजी सबको प्यारे है ॥

भैरूजी हैं भक्तों की अखियों के नूर,

नाम जपते ही होते, संकट सारे दूर ।

चिंता मिटाते हैं, दुःख हरनारे है,

सबके सहारे है, पालनहारे हैं ।

सदा जपो तो वारे न्यारे हैं,

नाकोड़ा भैरूजी सबको प्यारे है ॥

भैरूजी के दर्शन से चैन मन पाए,

भक्त भैरूदादा से मन वांछित पाए ।

दादा दिलवाले है, मन के दयालु है,

सबके सहारे है, पालनहारे हैं ।

सदा जपो तो वारे न्यारे हैं,

नाकोड़ा भैरूजी सबको प्यारे है ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।