सीमंधर स्वामी के पास जाना हैं

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॥ पावन पाठ ॥

सीमंधर स्वामी के पास जाना हैं,

संयम लेके, केवल पाके, मोक्ष हमको जाना हैं,

सीमंधर स्वामी के पास जाना हैं ॥

चौरासी लाख जीवयोनी में, अनंतकाल से भटकुं,

चारो गति में मेरे प्रभु, दुःख अपार में पाऊं,

अब तो स्वामी, दया करके, मुक्तिपूरी ले चलो,

सीमंधर स्वामी के पास जाना हैं..

कितने भावो तक भटका फिरा, प्रभु तेरा शासन ना पाया,

पुण्योदय से जैन धरम, इस भव में मैंने हैं पाया,

सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र दो,

सीमंधर स्वामी के पास जाना हैं..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।