मारी पार्वती काई जचग्यो रे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मारी पार्वती काई जचग्यो रे

थारे भोलो शंकर लेहरी।

पार्वती पार्वती काई जचग्यो रे

थारे भोलो शंकर लेहरी।

अरे रंग नहीं देख्यो थने ,

रूप कोनी देख्यो

सावला कलर को भोले लेहरी।

मारी पार्वती......

अरे घर नहीं देख्यो थने,

बार कोनी देख्या

कथे रेवे बेचारी मारी पार्वती

मारी पार्वती........

अरे बबक बबक यो वाणी बोले,

बूढ़ा रे डोकरा में काई देख्यो

बूढ़ा डोकरा में काई देख्यो

मारी पार्वती.....

करम फुटग्या मारी गोरा राणी ,

बालम जी बुढो मलग्यो

थाने बालम जी बूढ़ो मलग्यो

मारी पार्वती....

अंकित जी को नागर डीजे ,

राजपुरा में बाजे रे

राजपुरा में बाजे रे पूरा ,राजस्थान में बाजे रे

मारी पार्वती। …….

अभिनाश यो गीत लिख गावे

भरत जी मीणा मारे संग साथी

मारी पार्वती। …….

मारी पार्वती काई जचग्यो रे ,

थारे भोलो लेहरी।

पार्वती पार्वती काई जचग्यो रे ,

थारे भोलो लेहरी।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।