शंखेश्वर जी जाओ प्रभु पारस के गुण गाओ

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

शंखेश्वर जी जाओ, प्रभु पारस के गुण गाओ,

प्रकट प्रभावी पारस जी से मनवांछित फल पाओ ।

शंखेश्वर जी जाओ, प्रभु पारस के गुण गाओ..

भटकना छोड़ो यूं दर दर पे तुम,

प्रभु पारस की शरण में आओ ।

न भागो भाई दुःखो से डरके,

हर एक चौखट पे ये सर ना झुकाओ ।

पांचवा आरा हैं ही दुःखो का, भक्ति से कर्म खपाओ,

शंखेश्वर जी जाओ, प्रभु पारस के गुण गाओ ।।

करम का राजा रहम नहीं करता,

किसी भी प्राणी को वो ना छोड़े ।

नहीं मिलती हैं दुःखो से मुक्ति,

बिना कर्मो के फलों को भोगे ।

हंसते हुए जो कर्म हैं बांधे, समता से खपाओ,

शंखेश्वर जी जाओ, प्रभु पारस के गुण गाओ ।।

प्रभु पारस पे भरोसा कर लो,

मिटेंगे दुःखडे सभी जन्मो के ।

प्रभु की मस्ती करो मस्ती में,

मगन हो जाओ प्रभु चरणों में ।

'नाकोड़ा दरबार' 'प्रदीप' कहें, श्रद्धा को अटल बनाओ,

शंखेश्वर जी जाओ, प्रभु पारस के गुण गाओ ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।