आओ नन्द नंदन हे चितचोर

अलका गोएल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आओ नन्द नंदन हे चितचोर मुरली मनोहर नवल किशोर

नवल किशोर प्यारो नवल किशोर

बड़ी कठिन प्रेम की राह सखी री मैं का करू

पिया करते नहीं निगाह सखी मैं का करू

बड़ी कठिन प्रेम की राह सखी री मैं का करू

जनम जनम से चलती आयी नित नित नयी नयी ठोकर खायी

फिर भी गंद ना पीके आयी

मेरा छीन हुआ उत्साह सखी री मैं का करू

बड़ी....

पहले मन में प्रीत उगना

आशा से उससे बढ़ाना

बड़ी कठिन प्रेम की राह सखी री मैं का करू

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।