मैं क्यों न करू शुकराना गुरु जी तेरा शुकराना

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

गुरु जी मेरे मन में गुरु जी मेरे तन में

गुरु जी हर सास में गुरु जी हर धडकन में

मेरा तुझ संग रिश्ता पुराना

मैं क्यों न करू शुकराना गुरु जी तेरा शुकराना

तेरे नाम से मिट जाती है मन में जो चिंता हो,

तुम ही भाई बेहन अब मेरे तुम ही मात पिता हो,

ये रिश्ता यु ही निभाना

मैं क्यों न करू शुकराना गुरु जी तेरा शुकराना

सागर की बस यही तमना दर तेरे पे आऊ,

मुझको दाता इनता दिया मैं क्यों न शुकर मनाऊ

मेरा सपना पूरा करो न

मैं क्यों न करू शुकराना गुरु जी तेरा शुकराना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।