साईं बाबा मुझे ऐसा वरदान दो

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॥ पावन पाठ ॥

साईं बाबा मुझे ऐसा वरदान दो तेरा दर्शन मैं हमेशा पाता रहू

मुझ अज्ञान को बाबा वो ज्ञान दो मैं ध्यान तुम्हारा लगाता रहू

मैंने जब से साईं बाबा नाम सुना ये नाम मेरे हिरदये में बस गया,

मुझको बाबा मधुर सी तुम जुबान दो जिस से महिमा मैं तुम्हारी गाता रहू

साईं बाबा मुझे ऐसा वरदान दो तेरा दर्शन मैं हमेशा पाता रहू

रोम रोम मेरा ये पुकार रहा निष् दिन मैं तो बात निहार रहा

अपने चरणों में मुझको भी अस्थान दो नित चरणों में सिर ये झुकाता रहू

साईं बाबा मुझे ऐसा वरदान दो तेरा दर्शन मैं हमेशा पाता रहू

मैं तो काशी गया मथुरा अवध गया

नही शिर्डी सा कोई धाम मुझको मिला

अब तो आंखे तरस त्ती को वीरान को

दीया श्रधा से मैं तो जलाता रहू

साईं बाबा मुझे ऐसा वरदान दो तेरा दर्शन मैं हमेशा पाता रहू

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।