देख कर राम जी को जनक नंदनी

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

देख कर राम जी को जनक नंदनी,

भाग में वो खड़ी थी खड़ी रह गई,

राम देखे सिया को सिया राम को,

चारो अखियां लड़ी थी लड़ी रह गई,

हो इक केहनी लगी जानकी से सखी,

क्या खूब जमे गी सिया राम की जोड़ी,

पर मन में ये शंका बड़ी है थोड़ी,

ये धनुश कैसे तोड़े गे सूंदर कुंवर,

दर मन में बनी तो बनी रह गी,

देख कर राम जी जनक नंदनी,

भाग में वो खड़ी थी खड़ी रह गई,

राजा जनक रचे जग सिया का सयंबर,

आये गुरु वर के संग दोनों राज कुंवर,

सब अचरज हुये राम को देख कर,

दोनों हाथ से धनुश उठाये रघुवर,

सभी की नजर पड़ी तो पड़ी रह गई,

वर माला सियां ने डाली राम को चारो अखियां लड़ी की लड़ी रह गई,

देख कर राम जी जनक नंदनी,

भाग में वो खड़ी थी खड़ी रह गई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।