क्यों सताए मुझे क्यों रुलाये मुझे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

क्यों सताए मुझे क्यों रुलाये मुझे

इतना तो बोल दे मोहन

चुप क्यों है बोल दे मोहन

क्यों सताए मुझे.............

इतना बेदर्द क्यों हो गया है तू

अब तू बोल ज़रा किस्से जाके कहूं

इतना दर्द मिला मैं सहन कैसे

अब तो सुन भी ले मोहन

चुप क्यों है बोल दे मोहन

सबके तो सामने मैं तो हंसती रही

आंसू आँखों में अपने छिपाती रही

अब तो आंसू मेरे रुके ना रुके

इनको तू देख ले मोहन

चुप क्यों है बोल दे मोहन

हर किसी से जिसे मैं छिपाती रही

पर सांवरिया तुझको बताती रही

अब शिखा ने जो दुःख साहा सांवरे

उसको तू जान ले मोहन

चुप क्यों है बोल दे मोहन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।