पारस हैं तु मुझे पारस बना

पारंपरिक
अन्य भजन जैन भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

पारस हैं तु, मुझे पारस बना,

अपने वैभव का वारीस बना ।

समरत हैं तु, कर आशा पुरी,

नश्वरता हर, मुझे शाश्वत बना ॥

पारस हैं तु, मुझे पारस बना..

प्रभु मैं हुं कण तेल का, तु हैं अलौकिक प्रकाश,

तेरी तरफ मैं बढ़ता चला, कर मेरे अंतर्मन में उजास ।

अवगुण मेरे कर दे भस्म तु, दिव्य बना मुझे तेजस बना,

पारस हैं तु, मुझे पारस बना, अपने वैभव का वारीस बना ॥

मैं जड़ हुं, पत्थर हुं मैं, कर्मानुओ से बंधा,

चेतन हैं तु, शुद्ध बुद्ध तु प्रभु, घड़ आत्मा का स्वरूप मेरा ।

शिल्पी बनकर तु तराश मुझे, अपने जैसा जस का तस बना,

पारस हैं तु, मुझे पारस बना, अपने वैभव का वारीस बना ॥

मैं बिंदु, सिंधु हैं तु, तुझमें मिल जाना मुझे,

अपना वजूद मिटाकर के भी, प्रभु तुझमें ही अब समाना मुझे ।

तुझमें मुझमें अंतर ना रहे, ऐसा मेरे लिए मार्ग बना,

पारस हैं तु, मुझे पारस बना, अपने वैभव का वारीस बना ॥

जीर्ण शीर्ण है आत्मा मेरी, कर दो भव्य जीर्णोद्धार,

जीरावला पार्श्व एक तु, भक्तों का तारक, उद्धारक, आधार ।

करुणा नजर मुझपे करदे प्रभु, मेरे लिए दिल में अमिरस बना,

पारस हैं तु, मुझे पारस बना, अपने वैभव का वारीस बना ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।