जादूगर रसिया मेरे मन वसिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जादूगर रसिया मेरे मन वसिया होगी आधी रात अब घर जाने दो,

जादूगर रसिया मेरे मन वसिया.......

सब से पेहले तूने मेरा दिल किया चोरी

तू मेरा प्रीतम और मैं हु तेरी गोरी,

फिर चैन को मेरे छीन लिया बेचैन किया तूने मुझको

मैं तेरी प्रीत में पागल हो के कैसे बतलाऊ मैं तुमको

दिल के ये जज्बात अब घर जाने दो

जादूगर रसिया मेरे मन वसिया.......

मेरे तन पर किया तूने कैसा जादू

तेरी जादूगरी बाते करे बेकाबू,

जादू तेरी बातो का ही खीच के मुझको लाता है

काले काले नैनो से मेरे दिल पे तीर चलता है

नैनो से मत करो बार अब घर जाने दो

जादूगर रसिया मेरे मन वसिया

हर पल मुझे तेरी याद सताती है बंसी की तान मुझे बड़ा तडपाती है,

बिन तेरे दिल नही लगता है जाने को वही तू दीखता है

तुझसे मिलने की खातिर ये मेरा दिल तडपता है

सची कहू मैं ये बात अब घर जाने दो

जादूगर रसिया मेरे मन वसिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।