हाथ पकड़ता सबका और तु सबका साथी हैं,

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

हाथ पकड़ता सबका और तु सबका साथी हैं,

दो हाथ मेरे भी हैं, इनमे क्या खराबी हैं ।

तुम हाथ पकड़ते हो या हाथ देखते हो,

या किसमे फायदा हैं, पहले ये समझते हो ।

या हाथो में अलग अलग कोई खुशब आती हैं,

या हाथो में विधाता ने कोई छाप लगा दी हैं ॥

दो हाथ मेरे भी हैं, इनमे क्या खराबी हैं..

हाथो में नहीं होता, नजरो में फर्क होता,

यह हाथ पकड़कर देख, इनमे भी दर्द होता ।

या हाथो के कर्मो से तुझको नाराजगी हैं,

या हाथो के कर्मो से तुझको नाराजगी हैं ॥

दो हाथ मेरे भी हैं, इनमे क्या खराबी हैं..

बस इतना फर्क होता, ये छोटे-बड़े होते,

हो जाते बराबर जब तेरे आगे जुड़े होते ।

राजा और भिकारी दोनों ही फरियादी हैं,

राजा और भिकारी दोनों ही फरियादी हैं ॥

दो हाथ मेरे भी हैं, इनमे क्या खराबी हैं..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।