बरसाना भुलवा के दूर जाया न करो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

या तो हस के नैन मिलाया न करो

बरसाना भुलवा के दूर जाया न करो

फागन में कान्हा तुम आया न करो

लठ लग जा का इतराया न करो

राधे तू भी जाने इस दिल में जोर न

सारे बरसाने में तेरे जैसी और न,

होरी के वहाने बुलवाया न करो

बरसाना भुलवा के दूर जाया न करो

तेरी है फिकर कान्हा होरी लठ मार है,

नही पूरी बात ये रंगों का त्यौहार है

ये है मेहंगा शोंक फरमाया न करो

बरसाना भुलवा के दूर जाया न करो

भर पिचकारी मारी बच नही पाएगी

गाल का गुलाल लाऊ बोल काहा जायेगी

रंगों से राधा गबराया न करो

बरसाना भुलवा के दूर जाया न करो

चलने न दूंगी कान्हा आज तेरा जोर मैं

रंगों से कमल करदू सारा बोर मैं

मोहे देख रसिया तुम गाया न करो

लठ लग जाएगा इतराया न करो

बरसाना भुलवा के दूर जाया न करो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।