मेरे साईं की है चावडी

पारंपरिक
श्री राम भजन साईं भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मेरे साईं की है चावडी यहाँ बैठ ते थे वो शाम को

कभी अल्लहा अल्लहा बोलते कभी जपते थे श्री राम को,

कर पास दिल की थी दूरियां हट नफरतो के वो रास्ते,

दिया प्यार का दीपक जगा मेह्काया शिर्डी के धाम को

मेरे साईं की है चावडी यहाँ बैठ ते थे वो शाम को

है जुदा जुदा ये शरीर सब पर खून सब का एक है

क्यों बट रहे हो अलग अलग पहचान लो इंसान को

मेरे साईं की है चावडी यहाँ बैठ ते थे वो शाम को

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।