जोगेया एह बन के माई

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जोगेया एह बन के माई तेरे दर आया है साईं

ये उनका रूप अनोखा है तेरी नजरो का धोखा है

उन्हें पहचान नही पाई तेरे दर आया है साईं

जोगेया एह बन के माई तेरे दर आया है साईं

उनका तो सब से नाता है दीं दुखियो के दाता है,

तुझे खुशहाल बना देने माला माल बना देंगे,

हटेगी बदली जो छाई,तेरे दर आया है साईं

जोगेया एह बन के माई तेरे दर आया है साईं

इट के तकिये को लेके नीम के नीचे सोया है

तेरी तकदीर बनाने को छोड़ शिर्डी को आया है

दर्श है इनका सुख दाई तेरे दर आया है साईं

जोगेया एह बन के माई तेरे दर आया है साईं

वो अपनी धुन में रेहता है साईं साईं ही केहता है,

बदन है कंचन कंचन वो मिटटी को कर दे कुंदन

तेरी आँखे है भर आई तेरे दर आया है साईं

जोगेया एह बन के माई तेरे दर आया है साईं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।