बजे कुण्डलपर में बधाई

पारंपरिक
सूर्य देव भजन जैन भजन surya
॥ पावन पाठ ॥

बजे कुण्डलपर में बधाई,

के नगरी में वीर जन्मे, महावीर जी

जागे भाग हैं त्रिशला माँ के,

के त्रिभवन के नाथ जन्मे, महावीर जी

हो... शुभ घडी जनम की आई,

सवरग से देव आये, महावीर जी

तेरा नवन करें मेरु पर

के, इंद्र जल भर लाए, महावीर जी

हो.. तुझे देवीआं झुलाये पलना,

मन में मगन हो के, महावीर जी

तेरे पलने में हीरे मोती,

के. गोरिओं में लाल लटके, महावीर जी

हो... अब ज्योति तेरी जागी

के सूर्य चाँद छिप जाए, महावीर जी

तेरे पिता लुटावें मोहरें

खजाने सारे खुल जाएंगे, महावीर जी

हो... हम दरश को तेरे आए

के पाप सब काट जाएंगे, महावीर जी

बजे कुण्डलपर में बधाई,

के नगरी में वीर जन्मे, महावीर जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।