माँ दर तेरे आया हु

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरावालिये नी मेरिये माये दर तेरे आया हु,

दर तेरे आया हु

उचेया पहाड़ा विच बैठी मेरी माये दुनिया दे रंग बनाये,

अन्दिया ने संगता बन बन के टोली

मुह मंगिया मुरादा ने पौंदे,

माँ मेरी झोली है भरदी दिल नाल जो मंगन आवे

शेरावालिये नी मेरिये माये दर तेरे आया हु,

झोली है खाली तनक न कपड़ा तेरे तो न मंगन मैं आया

हथ जोड़ माँ मैं अरजा है करदा माये मेरी डूबदी नैया नु बचा ले

तेरे हथ डोर माये मेरी भावे छड दे जा पार लगा दे

शेरावालिये नी मेरिये माये दर तेरे आया हु,

मेरिया नसीबा वाले बूहे तू खोले अज खोले भावे कल खोले,

मेरिया हलाता ते दुनिया है हसदी क्यों छड गई माँ मेरी मैंनू

हाल दिल दा माँ मैं तेनु सुनावा होर सुनावा किह्नु

शेरावालिये नी मेरिये माये दर तेरे आया हु,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।