बड़ी आस लगी तुमसे

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॥ पावन पाठ ॥

बड़ी आस लगी तुमसे तेरी और निहारूं मैं

दादी मेरी दादी दादी ही पुकारूँ मैं

बड़ी आस लगी तुमसे ................

कितना कुछ कहना है ये सोच के आता हूँ

तुम्हे सामने पा कर के सब भूल ही जाता हूँ

मेरे आंसू समझती हो कैसे ये नकारु मैं

दादी मेरी दादी दादी ही पुकारूँ मैं

बड़ी आस लगी तुमसे ...............

सबने देखा मुझको हर पल मुस्काता हूँ

वो क्या जाने हँसके तकलीफ छिपाता हूँ

चाहे जितना रो लूँ चाहे जितना हारूँ

दादी मेरी दादी दादी ही पुकारूँ मैं

बड़ी आस लगी तुमसे ...............

अँधेरे जीवन में तू लायी उजाला है

जब जब भी सचिन भटका तूने ही संभाला है

ज्योति संग सेवा में तेरे चरण पखारूँ में

दादी मेरी दादी दादी ही पुकारूँ मैं

बड़ी आस लगी तुमसे ...............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।