मैं बंजारा श्याम का घुमु देश परदेश

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं बंजारा श्याम का घुमु देश परदेश

मेरे साथ साथ में हर दम चलता है खाटू नरेश

इक झोला कंधे पे जिस में श्याम भजन की पोथी है

इस पोथी में श्याम नाम के कितने हीरे मोती है

जब श्याम दीवाने मिलते उन्हें करता हु मैं पे

मैं बंजारा श्याम का घुमु देश परदेश

आज याहा कल वाहा ठिकाना इस नगरी कभी उस नगरी,

जाऊ याहा वही मिलती है श्याम की बगियाँ हरी भरी

जो श्याम शरण में रेहते उन्हें कोई नही कलेश

मैं बंजारा श्याम का घुमु देश परदेश

नित नया दरबार लगा कर मिलता श्याम सलोना है

नए नए रूपों में मुज्पे करता जादू टोना है

मुझको दर्शन देता है मुझको बदल बदल के वेश

मैं बंजारा श्याम का घुमु देश परदेश

जीवन में रंग बरने वाले कारीगर को क्या दू मैं,

दिल भी इसका जान भी इसकी इसके लिए क्या त्यागु मैं

बीनू पर दृष्टि दया की ये रखता नित हमेश

मैं बंजारा श्याम का घुमु देश परदेश

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।