जन्मो का प्यासा हु

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

जन्मो का प्यासा हु मेरी प्यास बुजा जाओ

मेरी अर्ज सुनो साईं इक झलक दिखा जाओ

जन्मो का प्यासा हु मेरी प्यास बुजा जाओ

मेरी टेर सुनो बाबा इक झलक दिखा जाओ

जन्मो का प्यासा हु मेरी प्यास बुजा जाओ

ये प्यास बड़ी प्यासी हे शिरडी के वासी,

मैं शातक हु तुम घन इक बूंद पिला जाओ

जन्मो का प्यासा हु मेरी प्यास बुजा जाओ

नैनो के नैन टले निंदिया को चैन मिले,

तुम सपन सरस बन कर आँखों में समा जाओ

जन्मो का प्यासा हु मेरी प्यास बुजा जाओ

माटी का पहिया हु भावो का जरिया हु

कब टूट बिखर जाऊ तुम हिरदये लगा जाओ

जन्मो का प्यासा हु मेरी प्यास बुजा जाओ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।