वामा नंदन आया है पार्श्वनाथ

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - ढोल बजने लगे......

प्यारे पार्श्व प्रभु , जन्मे जग के विभु

आया शुभ दिन आया है

करू वंदन , वो वामा नंदन आया है ...

हो ..ढोल बजने लगे , सब झूमने लगे

रंग भक्ति का छाया है

संग अपने वो खुशियां ,लाया है ...

झुमे रे सबका मनवा ..हम झूम झूम गाये

नाचे है भक्तो का मनवा .. हम झूम झूम गाये

जय जय हो .. तेरी जय जय हो...

जय जय हो .....तेरी जय जय हो...

नगरी वाराणसी सजी है सुहानी

पार्श्व कुँवर की हुई दुनिया दीवानी

कर रहे नर नारी प्रभु की अगवानी

जय हो ...जय हो ...जय हो ..जय हो..

जय हो ...जय हो ...

प्रभु परमेश्वर आया , देखो जिनेस्वर आया

संग अपने वो खुशियां ,लाया है ...

झूमे रे सबका मनवा ..हम झूम झूम गाये

नाचे है भक्तो का मनवा .. हम झूम झूम गाये

हो ..ढोल बजने लगे , सब झूमने लगे

रंग भक्ति का छाया है ...

जन्मकल्याण है प्रभु पार्श्व का

मंगल दिन ये , हर्षोउल्लास का

दशम वदी दिन ये पोष मास का

जय हो ...जय हो ...जय हो ..जय हो..

आया वामा का जाया , जग सारा हर्षाया

संग अपने वो खुशियां ,लाया है ...

झूमे रे सबका मनवा ..हम झूम झूम गाये

नाचे है भक्तो का मनवा .. हम झूम झूम गाये

हो ..ढोल बजने लगे , सब झूमने लगे

प्यारे पार्श्व प्रभु , जन्मे जग के विभु

आया शुभ दिन आया है

करू वंदन , वो वामा नंदन आया है ...

हो ..ढोल बजने लगे , सब झूमने लगे

रंग भक्ति का छाया है

संग अपने वो खुशियां ,लाया है ...

मधु के प्यारे प्रभुवर , हम झूम झूम गाये

कहता है ये दिलबर , हम झूम झूम गाये

झूमे रे सबका मनवा ..हम झूम झूम गाये

नाचे है भक्तो का मनवा .. हम झूम झूम गाये

हो ..ढोल बजने लगे , सब झूमने लगे

रंग भक्ति का छाया है ।

।।।।।।

✍️ रचनाकार ✍️

दिलीप सिंह सिसोदिया

❤️ दिलबर ❤️

नागदा जक्शन म.प्र .

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।