चिट्ठी जरा कान्हा जी के नाम लिख दे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हाल मेरे दिल का तमाम लिख दे

चिट्ठी जरा कान्हा जी के नाम लिख दे

लिख दे कि कान्हा मेरा जिया बेकरार है

अंखियों में भीगी भीगी की कजरे की धार है

होती नहीं सुबह से शाम लिख दे

चिट्ठी जरा कान्हा जी के नाम लिख दे

मुझको सताया तूने सबसे कहूंगी

एक दिन गिन-गिन बदले में लूंगी बदले में लूंगी

नाम तेरा होगा बदनाम लिख दे

चिट्ठी जरा कान्हा जी के नाम लिख दे

जाके सांवरा को तेरी याद भी ना आई है

कहता जमाना तेरा कान्हा हरजाई है

मेरा उसे फिर भी प्रणाम लिख दे

चिट्ठी जरा कान्हा जी के नाम लिख दे

Writing & adding

by Rahul Singh

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।