चारे पास सुख होण

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

चारे पासे सुख हौंन किसे नु ना दुःख हौंन॥

आवी बाबा नानका तू आवी बाबा नानका,

एहो जेहिया खुशिया लायावी बाबा नानका एहो जेहिया॥

जेहरे घर शाह हेनि ओस घरे रुख होजे,

जेहरे घर पुत्त हेनि ओस घर पुत्त होजे,

चारे पासे ठण्ड वरतइ बाबा नानका,

एहो जेहिया.......

सारी दुनिया दे विच कोई ना गरीब होवे,

एह्सा ना होवे कोई जेह्नु रोटी ना नसीब होवे॥

रुखी मिसी सब नु खान बाबा नानका

एहो जहिया....

लिरिक्स बी :- प्रिंस पंकज

9211191996,9910612590

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।