इंसान सूना सूना गुरु ज्ञान के बिना रे

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

इंसान सूना सूना गुरु ज्ञान के बिना रे

जैसे मंदिर सूना सूना भगवन के बिना

सूना है किसान जामे निंदिया न ताली होय

सूना है वो गांव जामे नाही खुशियाली होय

सूना है वो मंदिर जापे नाही रखवाली होय

सूना है बाग जामे नाही कोई माली होय

धनवान सूना सूना संतान के बिना रे

जैसे मंदिर सूना सूना भगवन के बिना रे

इंसान सूना सूना गुरु ज्ञान के बिना रे

जैसे मंदिर सूना सूना भगवन के बिना

सूना है तालाब जामे पिने को न नीर होय

सुनी है वो गाय जापे देने को न छिड़ होय

सूना है समाज जापे मुखिया बेपीर होय

सुनी है बहन जापे नै कोई बीर होय

रमा दल सूना सूना हनुमान के बिना

जैसे मंदिर सूना सूना भगवन के बिना

इंसान सूना सूना गुरु ज्ञान के बिना रे

जैसे मंदिर सूना सूना भगवन के बिना

सुनी है ये नार जाको नाइ सिंगर होय

सूना है वो क्षत्री जापे नाइ तलवार होय

सुनी राजधानी जाको नाइ सरदार होय

सुनी है सजनिया जाको नाइ भरतार होय

ये मानव सूना सूना सम्मान के बिना रे

जैसे मंदिर सूना सूना भगवन के बिना

इंसान सूना सूना गुरु ज्ञान के बिना रे

जैसे मंदिर सूना सूना भगवन के बिना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।