पलके ही पलके हम बिछाएंगे

पारंपरिक
माँ गंगा भजन जैन भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

पलके ही पलके हम बिछाएंगे, जिस दिन मेरे गुरुवर घर आएंगे,

हम तो है गुरुवर के जन्मो से दीवाने,

मीठे मीठे भजन सुनाएंगे, जिस दिन मेरे गुरुवर घर आएंगे,

पलके ही पलके हम बिछाएंगे, जिस दिन मेरे गुरुवर घर आएंगे ॥

घर का कोना-कोना हमने फूलों से सजाया,

बंधनवार सजाई, घी का दीपक जलाया ।

भक्त जनों को हम बुलाएंगे, जिस दिन मेरे गुरुवर घर आएंगे,

पलके ही पलके हम बिछाएंगे, जिस दिन मेरे गुरुवर घर आएंगे ॥

गंगाजल की धार से गुरु को न्हावन कराऊं,

भोग लगाऊं, लाड़ लड़ाऊं, आरती उतारू ।

खुशबू ही खुशबू हम उड़ाएंगे, जिस दिन मेरे गुरुवर घर आएंगे,

पलके ही पलके हम बिछाएंगे, जिस दिन मेरे गुरुवर घर आएंगे ॥

अब तो एक ही लगन लगी है, प्रेमसुधा बरसा दो,

जनम जनम की मैली चादर, अपने रंग रंगा दो ।

जीवन को सफल बनाएंगे, जिस दिन मेरे गुरुवर घर आएंगे,

पलके ही पलके हम बिछाएंगे, जिस दिन मेरे गुरुवर घर आएंगे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।