हर जनम में भैरव तेरा साथ चाहिए

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

हर जनम में भैरव तेरा साथ चाहिए,

सर पे मेरे दादा तेरा हाथ चाहिए ।

सिलसिला ये टूटना नहीं चाहिए,

मुझको तो बस इतनी सी सौगात चाहिए ॥

हर जनम में भैरव तेरा साथ चाहिए..

मेरी आंखों के तुम तो तारे हो,

जान से ज्यादा मुझे प्यारे हो ।

रूठे सारी दुनिया, तुम रूठना नहीं,

मुझको तेरे प्यार की बरसात चाहिए ॥

हर जनम में भैरव तेरा साथ चाहिए..

मुझपे तेरी कृपा ये कम ना हैं,

फिर भी छोटी सी एक तमन्ना है ।

मर ना जाये दादा तुम्हे याद करके,

जीते जी एक तुमसे मुलाकात चाहिए ॥

हर जनम में भैरव तेरा साथ चाहिए..

मेरी दुनिया को तुम बसाये हो,

मेरी सांसो में तुम समाये हो ।

दिन में साथ साथ तुम रहो मेरे,

सपनो में आते रहो, वो रात चाहिए ॥

हर जनम में भैरव तेरा साथ चाहिए..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।