हम जैन कुल में जन्मे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

हम जैन कुल में जन्मे, अभिमान करो रे,

अभिमान करो रे, गुणगान करो रे,

हम जैन कुल में जन्मे, अभिमान करो रे..

कहते हैं प्रणाम सागर, ध्यान करो रे,

ध्यान करो रे, प्रणाम करो रे,

नवकार जपो रे, जयकार करो रे,

हम जैन कुल में जन्मे, अभिमान करो रे..

गुरुवर हैं बड़े सच्चे, इनका मान करो रे,

सन्मान करो रे, ये ध्यान धरो रे,

सन्मान करो रे, ये ध्यान धरो रे,

हम जैन कुल में जन्मे, अभिमान करो रे..

प्रभु लगते बड़े अच्छे, सब नाम जपो रे,

सतकाम करो रे, ये काम करो रे,

सतकाम करो रे, ये काम करो रे,

हम जैन कुल में जन्मे, अभिमान करो रे..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।