दुःख ता बथेरे पर दुखड़ा सुनोना नही

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी तकदीर विच लेखा दी लकीर विच

दुःख ता बथेरे पर दुखड़ा सुनोना नही

ऐवे आप रो के माये तेनु मैं रवोना नही

दुखड़ा सुनोना नही तेनु मैं रोवाना नही

जेह्ड़े हाल हा मैं ओसे हाल विच रह ला गा,

जीना चिर साह ने मेरे ओहना चिर सेह ला गा

जोंदे जी ता माये मैं कदे गबरोना नही

ऐवे आप रो के माये तेनु मैं रवोना नही

दुखड़ा सुनोना नही तेनु मैं रोवाना नही

चुप चाप सेह ला माये वक़्त दिया मारा मैं

रखी मेहर मेरे उते होंसला न हारा मैं

पुछ के सवाल तेनु सोचा विच पौना नही

ऐवे आप रो के माये तेनु मैं रवाना नही

दुखड़ा सुनोना नही तेनु मैं रोवाना नही

जीवन मैं अपना माये तेरे लेखे लाया ऐ,

डोलना नही भोरा बी मैं मन एह बनाया ऐ,

सागर ने तनु कदेदुःख माँ पोह्चाना नही

ऐवे आप रो के माये तेनु मैं रवाना नही

दुखड़ा सुनोना नही तेनु मैं रोवाना नही

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।