मेरा चंचल क्यों नही आया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

गुफा तो बाहर आ भगता नु पुछदी एह महा माया,

मेरा चंचल क्यों नही आया मेरा चंचल क्यों नही आया

नवे साल दा मेला हर दम कटरे विच लग दा ऐ,

देश विदेश दा यात्री भेटा चंचल दिया सुन्दा ऐ,

माँ पुछदी एह ओहने मेरा जय कारा क्यों नही लाया

मेरा चंचल क्यों नही आया मेरा चंचल क्यों नही आया

जावो नही कोई मोड़ ले आओ मेरे चंचल प्यारे नु

अखियाँ तरस गईया अखियाँ दे तारे नु

सब नु शक्ति देवन वाली माता दा दिल गबराया

मेरा चंचल क्यों नही आया मेरा चंचल क्यों नही आया

युग युग जीवन भापा जी सारे लोकी एहियो चाहंदे ने

चंचल दी भेटा चो सागर दर्शन माँ दे पाऊंदे ने

यात्रा तो पेहला सुन दे ने चलो बुलावा आया

मेरा चंचल क्यों नही आया मेरा चंचल क्यों नही आया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।