नाकोड़ावाले भैरू बाबा, लीला तेरी हैं सबसे निराली

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॥ पावन पाठ ॥

तुम्हें सिर्फ याद करने से तुफान भी हट जाते हैं,

जुबान पे नाम जो आए तो समंदर भी सिमट जाते है ।।

अम्बा के नंदन, हे दुख भंजन, सुन लो अब तो विनती हमारी,

नाकोड़ावाले भैरू बाबा, लीला तेरी हैं सबसे निराली,

कबसे खड़े है दर पे तुम्हारे, ईच्छा करने की हुई पुजा तुम्हारी,

नाकोड़ावाले भैरू बाबा, लीला तेरी हैं सबसे निराली..

ओ मेरे भैरू देवा, करे पारस की सेवा,

ध्यान जो भी लगाएं, अमरपद को वो पाएं ।

भक्त जो राह भटके, चाहे मार्ग में अटके,

उन्हें मार्ग दिखाएं, चलना उनको सिखाएं ।

अमीरों का सहारा, गरीबों का गुजारा,

कैसे इस जग में अब नैय्या पार लगाएं ।

कोई ना साथी, कोई ना मांझी,

डूबती नैय्या को गर ना उबारें ।

नाकोड़ावाले भैरू बाबा, लीला तेरी हैं सबसे निराली..

भक्त करें मांग तबकी, तुम्हें हैं याद सबकी,

निपुत को पुत देता, रोटी भुखे को देता ।

बिछुडो को मिलाता, धैर्य मायुस को देता,

जिसे सबने गिराया, उसे तुने संभाला ।

तुने दुनियां संवारी, क्यों ना सुनता हमारी,

भैरू की कव्वाली को, 'भक्त मोहन' ये गाएं,

लाएं मुरादें, मन में संजोए,

आएं चौकट पे लाखो नर-नारी ।।

नाकोड़ावाले भैरू बाबा, लीला तेरी हैं सबसे निराली..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।