मांगते ही रहते तुझसे, सांझ सवेरे

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॥ पावन पाठ ॥

मांगते ही रहते तुझसे, सांझ सवेरे,

हाथ ये फैले रहते, सामने तेरे,

तुने खुब दिया भगवान, तेरा बहोत बड़ा एहसान,

तेरा बहोत बड़ा एहसान, तुने खुब दिया भगवान.......

याद हैं मुझे वो दिन, खाली जेब थी मेरी,

दर दर भटकता था मैं, दर दर भटकता,

गैरो की क्या कहुं, अपनो की आंखों में,

रह रह खटकता था मैं, रह रह खटकता,

चारो तरफ थे मेरे, गम के अंधेरे,

आखिर में आया दादा काम तु मेरे,

तुने खुब दिया भगवान, तेरा बहोत बड़ा एहसान,

तेरा बहोत बड़ा एहसान, तुने खुब दिया भगवान..

मांगना मैं छोड़ दु, हो नहीं सकता प्रभु,

आदत ना जाए मेरी, आदत ना जाए,

और तुझसे लेने में मुझको कभी,

लाज ना आए दादा, लाज ना आए,

दबा जा रहा हुं मैं तो, कर्ज में तेरे,

एहसान कितने दादा, मुझपे हैं तेरे,

तुने खुब दिया भगवान, तेरा बहोत बड़ा एहसान,

तेरा बहोत बड़ा एहसान, तुने खुब दिया भगवान..

लायक नहीं था मैं, इतने के लिए प्रभु,

जितना दिया हैं तुने, जितना दिया हैं,

सुने से जीवन मे, तुने खुशनसीबी का,

रंग भर दिया हैं दादा, रंग भर दिया हैं,

खाली मुझे दर से, तु कभी ना लौटाना,

इतना हंसाया तुने, अब ना रुलाना,

तुने खुब दिया भगवान, तेरा बहोत बड़ा एहसान,

तेरा बहोत बड़ा एहसान, तुने खुब दिया भगवान..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।