हम आए शरण तिहारी

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॥ पावन पाठ ॥

हम आए शरण तिहारी, ओ भैरव समकितधारी,

के कर जोड़े विनती करे हम, के कर जोड़े विनती करे हम,

ओ भैरवनाथ मेरे, ओ भैरवनाथ मेरे, सुन मेरी रे..

तेरा मुखड़ा पूनम चंदा, हुवा पुलकित मन आनंदा,

जय हो जय हो,

तेरा मुखड़ा पूनम चंदा, हुवा पुलकित मन आनंदा,

के सर पर मुकुट सजे, के सर पर मुकुट सजे, मनुहारी रे,

हम आए शरण तिहारी...

मेरा दुःखडा तुम्हे सुनाऊ, कहो छोड़ कहां मैं जाऊ,

जय हो जय हो,

मेरा दुःखडा तुम्हे सुनाऊ, कहो छोड़ कहां मैं जाऊ,

के दुःख मेरा दुर करो, के दुःख मेरा दुर करो, क्यों देरी रे,

हम आए शरण तिहारी...

तेरा ध्यान धरु हर पल मैं, तेरी छवि बसी मेरे मन मे,

जय हो जय हो,

तेरा ध्यान धरु हर पल मैं, तेरी छवि बसी मेरे मन मे,

तेरे बिन दुजा ना लगे, तेरे बिन दुजा ना लगे, सुखकारी रे,

हम आए शरण तिहारी...

नित माला जपु मैं तेरी, करो पूरण आशा मेरी,

जय हो जय हो,

नित माला जपु मैं तेरी, करो पूरण आशा मेरी,

के चिंता मेरी दुर करो, के चिंता मेरी दुर करो, उपकारी रे,

हम आए शरण तिहारी...

तेरे चरणों में शीश नवाते, सच्चे मन से ध्यान लगाते,

जय हो जय हो,

तेरे चरणों में शीश नवाते, सच्चे मन से ध्यान लगाते,

के हम सब तेरे हैं, के हम सब तेरे हैं, पुजारी रे..

हम आए शरण तिहारी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।