अपने जैन धरम की सबसे अनमोल ये घड़ी

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॥ पावन पाठ ॥

अपने जैन धरम की सबसे अनमोल ये घड़ी,

जन्म कल्याणक हैं आया, छाई खुशियां बड़ी..

त्रिशलानंदन राजदुलारा झुले फूलों की लड़ी,

आओ मिलकर हम मनाएं आज मंगल ये घड़ी..

चंडकौशि चंदनबाला तुने हैं उठाएं,

आत्मा की आभा से हुए हैं उजाले..

मोहमाया को भी त्यागा, तुझसे समता हैं जुड़ी,

जिओ और जीने दो सबको, अमृतवाणी हैं तेरी..

अपने जैन धरम की सबसे अनमोल ये घड़ी,

जन्म कल्याणक हैं आया, छाई खुशियां बड़ी..

महावीर के तत्वों को जीना भी होगा,

मानना नहीं, उन्हें जानना भी होगा..

आचरण में गर तुम लाओ, तो सफलता हैं बड़ी,

रंग लाएगी जीवन में यहीं आशा की कड़ी..

अपने जैन धरम की सबसे अनमोल ये घड़ी,

जन्म कल्याणक हैं आया, छाई खुशियां बड़ी..

समता अहिंसा का बीज उसने बोया,

पंथो की लड़ाई में, कहीं पे हैं खोया..

फिरसे एक हो जाए हम, यही मांग हैं अभी,

साथ मिलकर हम चले तो मिट जाए मुश्किलें बड़ी..

अपने जैन धरम की सबसे अनमोल ये घड़ी,

जन्म कल्याणक हैं आया, छाई खुशियां बड़ी..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।