सेवा पूजा कर नहीं पाया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

सेवा पूजा कर नहीं पाया, हुं किस्मत का मैं मारा,

तेरे भक्तों के घर मे दादा मुझे देना जनम दोबारा..

मात-पिता मुझे ऐसे देना, जो तेरी ज्योत जलाते हो,

भाई-बहन मुझे ऐसे देना, जो तेरे दर पे आते हो..

पुत्र मुझे तू ऐसा देना, जो तेरी आंखों का तारा,

तेरे भक्तों के घर मे दादा मुझे देना जनम दोबारा..

दिल देना तो ऐसा देना, जो बस तुमसे प्यार करे,

हर सगे-संबंधी से भी ज्यादा, तुझपे वो ऐतबार करे..

इस दिल से जब भी निकलेगा, तेरा ही हो जयकारा,

तेरे भक्तों के घर मे दादा मुझे देना जनम दोबारा..

गली-मोहल्ला ऐसा देना, जहां पे तेरी भक्ति हो,

मेरे पड़ोसी ऐसे देना, जो तेरी चर्चा करते हो..

भक्ति मंडल मुझे ऐसा देना, जो मेरे संग में गाता हो,

तेरे भक्तों के घर मे दादा मुझे देना जनम दोबारा..

सेवा पूजा कर नहीं पाया, हुं किस्मत का मैं मारा,

तेरे भक्तों के घर मे दादा मुझे देना जनम दोबारा..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।