चाहे तू ऊँगली पे पर्वत उठा ले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चाहे तू ऊँगली पे पर्वत उठा ले

चाहे तू कालियां नाग नठा ले

मुझको नन्द के लाल इम्प्रेस नही कर पाए गा

चाहे तू मेरी कंप्लेंट करा दे पुलिस नही तू मिलटरी बुला दे

मैं हु ब्रिज का बांका इम्प्रेस तुझे कर जाउगा

असुरों को मार के मर इतराना

काम है तेरा गईया चराना

मुझको तो राज कुमार आके कोई वर जाएगा

होगी तू ब्रिश्भानु दुलारी

मैं भी तो हु कृष्ण मुरारी यमुना को करके मैं पार

भगा के तुझे ले जाऊँगा

भले ही तूने कंस को मारा

पर तू है रन छोड़ विचारा,

ऐसे लगाऊ गी मार,

के जंगल से भाग जाएगा

हां मैं रन को छोड़ के भागा जोड़ा तुझ संग प्रेम का धागा

प्रेम की डोरी में ये ओ राधे तुझे बाँध जाऊँगा

मैं हु गोरी और तू है काला

अपना मेल नही होने वाला

आना न यमुना के पार नही तू पश्तायेगा

मैं हु काला सुन राधे रानी

मुझ काले की दुनिया दीवानी

चंदन काले रंग में ओ राधे तुझे रंग जाऊँगा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।