तेरा लख लख शुक्र मनावा चिन्तापुर्णी माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरा लख लख शुक्र मनावा चिन्तापुर्णी माँ ॥

मैं तेरे ही गुण गांवा चिन्तापुर्णी माँ -आ-आ॥

तेरा लख लख शुक्र मनावा चिन्तापुर्णी माँ ॥

चरणा दे नाल लाके दाती ने, इज्ज़ता साडीयां रखीयां ने ॥

रुस दा ऐ जग रूस जावे पर ,माँ नाल प्रीता पक्कीया ने॥

मै तेरा दास कहावा आ_आ

चिन्तापुर्णी माँ आ आ आ ॥

तेरी किरपा नाल दातीये ,चिंता मुक गई मेरी माँ॥

कर के रहमत झोली भर के,किस्मत फेरी मेरी माँ॥

नाले कीतीयां ठण्डीयां छांवा॥

चिन्तापुर्णी माँ आ आ आ॥

तेरे दर ते नच दा, फिर दा अमित धर्मकोटी माँ॥

तेरे होके चमकी ऐ,धु दी किस्मत खोटी माँ॥

नाले दसीया आपे रावा आ आ आ २॥

तेरा लख लख शुक्र मनावा चिन्तापुर्णी माँ आ आ आ॥

SINGER : अमित धर्मकोटि

मोबाइल नंबर :: ९८१५१ 54501

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।