तु मुझे देखे करुणा से

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॥ पावन पाठ ॥

तु मुझे देखे करुणा से, मैं तुझे देखु आशा से,

मुख से कुछ ना बोलु मैं, बोलु मन की भाषा से..

दिल में तेरे प्यार हैं, तु भक्तों का आधार हैं,

तु मुझे देखे करुणा से, मैं तुझे देखु आशा से..

बड़ा ही सुंदर पावन तेरा धाम,

ठाठ निराले, ऊंची तेरी शान..

शंखेश्वरा, परमेश्वरा, दिनानाथजी, ओ जिनेश्वरा,

तु महिमा भंडार हैं, तु भक्तों का आधार हैं,

तु मुझे देखे करुणा से, मैं तुझे देखु आशा से,

शरणागत का भय हारता हैं तु,

शांति दाता, सुखकर्ता हैं तु..

चिंतामणि, पारसमणि, तु सुरतरु, तु सुरमनी,

पर्चा तेरा पार हैं, तु भक्तों का आधार हैं,

तु मुझे देखे करुणा से, मैं तुझे देखु आशा से,

आज से मैं ये करता हुं वादा,

तु मेरा, मैं तेरा हुं दादा..

सरताज तु, सरकार तु, मेरा नाथ तु, महाराज तु,

प्यारा तेरा दरबार हैं, तु भक्तों का आधार हैं,

तु मुझे देखे करुणा से, मैं तुझे देखु आशा से,

मिट जाए मेरे भव भव के फेरे,

ऐसी आशीष मांगु प्रभु मेरे..

सर पर प्रभु रखो हाथ जी, विनती हैं ये दरबार की,

'प्रदीप' का तु किरपार हैं, तु भक्तों का आधार हैं,

तु मुझे देखे करुणा से, मैं तुझे देखु आशा से,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।