चरणों मे जगह मांगी थी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

चरणों मे जगह मांगी थी, हमें दिल मे बसा लिया,

थे एक नजर के प्यासे, नजरों में समा लिया,

आपका शुक्रिया, आपका शुक्रिया..

वरदान भरी दृष्टि से, हमें बनाया त्रिकाल दर्शी,

जन्मों के पुण्य फले हैं, प्रभु दया हैं इतनी बरसी..

फलको से उठाकर मोती, आंखों का बना लिया,

थे एक नजर के प्यासे, नजरों में समा लिया,

आपका शुक्रिया, आपका शुक्रिया..

खुशियों के पंख लगाकर, जी करता हैं उड़ जाऊं,

प्रभु प्रेम के बादल बनकर, हर मन की प्यास बुझाऊं..

सत्कर्मों के सरगम में, हमें गाना सिखा दिया,

थे एक नजर के प्यासे, नजरों में समा लिया,

आपका शुक्रिया, आपका शुक्रिया..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।